HinCh08-अध्याय ८: स्वरगंधर्व की विदाई - एक नटखट तूफान की शांति...
अन्य भाषाएं: मराठी English अध्याय ८: स्वरगंधर्व की विदाई - एक नटखट तूफान की शांति... दृश्य: साठ के दशक की एक शांत दोपहर। पेडर रोड स्थित मंगेशकर निवास पर अचानक लैंडलाइन फोन 'ट्रिंग... ट्रिंग...' बजता है। दूसरी तरफ से एक बड़े संगीतकार का भारी स्वर आता है, "हैलो, क्या लताजी हैं?" इधर से बिल्कुल लता दीदी की शांत, संयमित और स्वर्गीय आवाज़ में जवाब आता है, "नहीं, वह रिकॉर्डिंग के लिए गई हैं। मैं उन्हें आपका संदेश जरूर दे दूंगी..." दूसरी तरफ का व्यक्ति अत्यंत सम्मान के साथ फोन रख देता है। उसे बिल्कुल भी पता नहीं होता कि उसने अभी जिस 'लता दीदी' से इतनी श्रद्धा के साथ बात की, वह असल में उनकी नटखट और हूबहू आवाज़ निकालने में माहिर छोटी बहन थी... हमारी प्यारी आशा ताई! हाँ दोस्तों! मंगेशकर परिवार में लता दीदी एक शांत, सात्विक और पवित्र नदी की तरह थीं, तो आशा ताई एक चुलबुला, नटखट...